बुधवार, 2 नवंबर 2011

अगर ऐसा हो जाये?

>एक अच्छी खबर है कि पंजाब की लवली प्रोफैशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के कम्युनिटी सर्विस सेल द्वारा दस एनएसएस यूनिट्स का गठन किया गया. इन यूनिट्स के अंतर्गत 2 ,000 से अधिक छात्रों ने स्वेच्छापूर्वक स्वयं को रजिस्टर्ड करवाया है. हर स्वयंसेवक दो वर्षों में 240 घंटे सामुदायिक कार्यों को देंगे. अंततः छात्रों में अनुशासन पैदा होगा और उनका बेहतर चरित्र निर्माण होगा. इसके अतिरिक्त छात्रों का स्वस्थ्य बेहतर होगा और वे देश की संस्कृति को अच्छे ढंग से समझ सकेंगे.
>एलपीयू के डायरेक्टर-जनरल एच. आर. सिंगला का कहना है कि एनएसएस यूनिट्स का गठन इसलिए किया गया है ताकि आज के युवा समाज सेवा कर सकें और कुछ बेहतर सीख सकें. उनका ये भी मानना है कि ऐसी गतिविधिओं से युवा ना केवल अपनी बेहतरी कर सकेंगे बल्कि देश के विकास में भी अहम भूमिका अदा कर पाएंगे.
>सबसे दिलचस्प पहलू तो ये है कि यूनिवर्सिटी की जिन छात्र-छात्राओं ने स्वयं को एनएसएस यूनिट्स के लिए रजिस्टर्ड करवाया है, उनके विचार उच्च दर्जे के हैं. मधु ओबेरॉय, संतोष, गुरजीत राणा, सामुएल, आबिद, रुखसाना, जतिंदर व् अन्य छात्र-छात्राओं का कहना है कि इस पहल से उन्हें समाज के प्रति भागीदारी, सेवा और उपलब्धियों को विकसित करने का मौका मिला है.
>आज देश भर के युवाओं में मधु ओबेरॉय, संतोष और उनके अन्य साथियों जैसा जज्बा पैदा करने की आवश्यकता है जबकि देश के युवाओं की अच्छी खासी संख्या भटकाव के मोड़ पर है. भटकाव की इस स्थिति में युवाओं को कोई सही राह दिखानेवाला नहीं मिल रहा है. आज देश के अधिकतर युवा पश्चिम की सभ्यता का आँखें मूँद कर अनुसरण कर रहे हैं, अपने बड़े-बुजुर्गों की इज्ज़त करना भूल चुके हैं. ऐसी बात नहीं है कि युवाओं को दूसरों का अनुसरण नहीं करना चाहिए. वे ऐसा जरूर करें. मगर, थोडा सोच-समझ कर. ऐसा ना हो कि भविष्य में उन्हें पछताना पड़े.
>आजकल हम लोग छोटी-छोटी बात के लिए सरकार का मूंह ताकते हैं. युवाओं की स्थिति बदले, इसके लिए भी सरकार की तरफ ही देख रहे हैं. स्वयं कुछ नहीं कर रहे. वैसे युवाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए सबसे बड़ी जिम्मेवारी ना केवल माता-पिता की बनती है, बल्कि शैक्षणिक संस्थायों की भी बनती है. शैक्षणिक संस्थायों को चाहिए की वे कुछ एक छात्र-छात्राओं को ही कम्युनिटी सर्विस के लिए ना चुनें. संस्था के सभी छात्र-छात्राओं को इसका अवसर दें. अगर ऐसा हो जाता है तो देश में एक दिन नयी क्रांति आ सकती है जिसकी किसी ने कल्पना भी ना की होगी.
>अंत में:
>क्या किसी भी शैक्षणिक संस्था में सभी छात्र-छात्राओं को कम्युनिटी सर्विस का अवसर दिया जाना चाहिए?

1 टिप्पणी:

  1. It is absolutely right step by the educational institution to promote the students to take part in community services in various areas like health, blood donation, education to poor, cleanliness and others. The students along education must know about the social services and become the responsible citizen to do something beneficial for the country. Such services also encourage the human bonding with others and also a right step to become the responsible citizen of the country.
    Regards : Harpreet Singh

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