सोमवार, 26 सितंबर 2011

कब आयेगी सामाजिक समानता ?

लुधिआना, पंजाब, के जाने - मान चार्टड अकाउंटेंट राजीव के. शर्मा ने एक सन्देश भेज कर बेहद गंभीर मुद्दा उठाया है. उनका मत है कि वतन के लिए शहादत देने वालों के सपने तब तक मुकम्मल नहीं होंगे जब तक कि देश में सामाजिक समानता नहीं आती. इस बात में रत्ती भर भी शक की गुंजाइश नहीं है. आज देश की क्या स्थिति है, इस के बारे में हम सब जानते ही हैं.
अमीर और गरीब में फासला निरंतर बर्धता जा रहा है. जब से डेस्क में व्यवसायिक गतिविधिओं का प्रचलन बढ़ा है, हालत और भी गंभीर हो गई हैं. अमीरों के लिए माल्स खुल गए है. उनके लिए वातानुकूलित ट्रेनें चल पडी हैं. ना जाने क्या क्या सुख सुविधाएं पैदा हो चुकी हैं. दूसरी और आज भी गरीबों को भरपेट भोजन नहीं मिलता, रहने को छत नसीब नहीं होती और पहनने को ढंग के कपडे नहीं मिलते. ट्रेनों के डिब्बों पर नजर डाली जाये तो उनमें आम आदमी माल गोदाम की तरह भरा हुआ मिलता है.
देश को 1947 में आजादी प्राप्त हुई थी. इतने बरसों बाद भी देश में सामाजिक समानता दिखाई क्यों नहीं देती. इस के लिए कौन लोग जिम्मेवार हैं. देश के नेता तो हैं ही. हब सब भी इस के लिए जिम्मेवार हैं. हम सब में भी जागरूकता की कमी दिखाई देती है. हमें भी अपना कर्तव्य समझ कर कुछ ना कुछ अवश्य करना चाहिए. किसी गरीब के बच्चे को शिक्षा दिलवाने में मदद कर देनी चाहिए. गरीब का बच्चा एक बार अपने पाँव पर खड़ा हो गया तो उसकी आने वाली नस्लें सुधर जाएँगी. देश सुधर जाएगा. अमीरों को चाहिए कि किसी किस्म का दिखावा ना कारें. अफ़सोस तो इस बात का है कि अमीर दिखावा करके अपने को सबसे महान सिद्ध करना चाहता है. तभी तो बहुमंजिला महल खड़े करके सड़कों पर रहने वाले गरीबों का मजाक उडाता है.
अंत में:
सामाजिक समानता लाने में आम नागरिक की क्या भूमिका हो?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें