मंगलवार, 20 सितंबर 2011

आत्महत्या क्यों?

उदयपुर से एक बेहद दुखद समाचार पढने में आया है. गोगुंदा थाना क्षेत्र एक मां ने अपनी पंद्रह दिन की मासूम बच्ची को छोड़कर खुद आत्महत्या कर ली. मंगलवार शाम उसका शव घर के पास ही एनीकट में मिला। वह सोमवार रात से ही लापता था, मंगलवार सुबह उसका शव मिलने पर आत्महत्या का पता चला. मृतका लक्ष्मी (27) पत्नी वालू गमेती थी.

सच है कि आत्महत्या की ऐसी घटनाएँ अक्सर होती रहती हें. इंसान का जब स्वयं पर काबू नहीं रहता तो वह ऐसा ही करता है. लेकिन, आत्महत्या किसी भी समस्या का हल नहीं है. हर मानव के जीवन में कोई न समस्या होती ही है. मगर, इस का मतलब यह तो नहीं कि आत्महत्या ही कर ली जाये. एक व्यक्ति अकेला नहीं होता. उसके साथ कई और रिश्ते भी जुड़े होते हैं. कई और लोग भी उसपर निर्भर होते हैं. लक्ष्मी तो चले गयी. उसने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली है. इस घटना के पीछे के हालत कुछ भी हो सकते हैं. उसने आत्महत्या करके अपने साथ तो अन्याय किया ही है, अपनी नवजात बेटी के साथ तो घोर अन्याय किया है. उसकी नवजात बेटी बड़ी हो कर अपनी माँ के बारे में क्या सोचेगी. यही कि वह एक कायर माँ की औलाद है. उस बेचारी को अपना तमाम बचपन माँ की गोद व् दुलार के बिना ही गुजारना होगा. इस संसार के लोग बार-बार उसे याद दिलाएंगे कि उसकी माँ ने आत्महत्या की थी. तब उस पर क्या बीतेगी, इसका अनुमान लगाकर ही दिल कांपने लगता है. अगर लक्ष्मी ने आत्महत्या ही करनी थी तो उसने बेटी को जन्म ही क्यों दिया.

जब कोई व्यक्ति आत्महत्या के बारे में सोचने लगता है तो उसके व्यवहार में कुछ ना कुछ परिवर्तन जरूर आता है. यही वह समय है जब परिवारवालों को ऐसे व्यक्ति के व्यवहार पर नज़र रखनी चाहिए.

अंत में:

आत्महत्या की घटनाओं को किस तरह से रोका जा सकता है?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें