बिहार के जहानाबाद जिले के मखदुमपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने शनिवार को एक होटल पर छापामार कर 75,000 रुपए के जाली नोट बरामद किये. खबर के मुताबिक इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया. इस तरह की खबर कोई नयी बात नहीं है. मीडिया में अक्सर ऐसी खबर पढने या सुनने को मिल ही जाती है. देश का शायद ही कोई ऐसा कोना हो जहाँ लोग इस समस्या का सामना ना कर रहे हों.
जाली करंसी का चलन देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद घातक है. ऐसी भी खबरें समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती हैं कि बैंक के ऐ. टी .एम् . से भी जाली करंसी निकल आती है. शामत बेचारे आम आदमी की आ जाती है जो मेहनत से कमाई करता है मगर उसके नसीब में जाती नोट आ जाता है.
आखिर किसी भी व्यक्ती की इतनी हिम्मत क्यों हो कि वह जाली नोट तैयार कर सके. सरकार को इस सम्बन्ध में उचित कदम उठाने की जरूरत है. सरकार को ऐसी करंसी तैयार करनी चाहिय कि कोई जाली करंसी बना ही ना सके. सरकार को सख्त से सख्त कानून बनाना चाहिए जिस से जाली करंसी बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके.
जाली करंसी चलने से नुक्सान तो आम व्यक्ती का भी होता है. मान लीजिये, एक व्यक्ती बैंक में अपनी मेहनत की कमाई जमा करवाने गया है. वहां जा कर उसे मालूम पड़ता है कि 500 रूपए का एक नोट जाली है. बैंक कर्मचारी तुरंत उस नोट को ना चलनेयोग्य करने हेतु उसपर पेन से उल्टी - सीधी लाईने खींच देता है. बेचारा आम आदमी रोता हुआ बैंक से बाहर आता है. सरकार को इस समस्या का हल भी ढूंढना चाहिए. आखिर उसका काम जनता की सेवा करना ही तो है. जो मुजरिम हैं उनके साथ मुजरिमों जैसा व्यवहार ही किया जाये.
अंत में:
सरकार को जाली करंसी के विरुद्ध किस तरह के कदम उठाने चाहियें?
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