जम्मू के सांबा सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा की बैनगलाड़ पोस्ट पर मंगलवार ढाई बजे पाकिस्तान की ओर से फायरिंग की गई। पाकिस्तान की चिमनी गलाड़ और गलाड़ टांडा पोस्ट से हुई इस फायरिंग में बीएसएफ की 59 बटालियन के सब इंस्पेक्टर राम चंद्र राणा शहीद हो गए. राम चंद्र राणा कालोनी आजादपुर जिला देहरादून, उत्तराखंड के रहने वाले थे । बेहद खेदपूर्ण बात है कि
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इस तरह की घटनाएँ हो रहीं हैं. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. ख़बरों के मुताबिक सांबा सेक्टर में पाक की ओर से एक सप्ताह में दूसरी बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया है.
विचारयोग्य बात ये है कि आखिर ऐसा कब तक चलेगा. कब तक इस तरह देश के सिपाही शहीद होते रहेंगे. ऐसी घटनाओं पर देश के बड़े नेता खामोश क्यों हो जाते हैं. ऐसी घटनाओं की सार्वजानिक तौर पर निंदा क्यों नहीं करते. क्यों नहीं कहते कि संघर्ष विराम का उल्लंघन करने के लिए पकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामला उठाया जाएगा. क्या देश के नेताओं के लिए सीमा पर होने वाली ऐसी घटनायें कोई मायने नहीं रखतीं?
सच तो ये है कि देश के नेताओं को एक दूसरे पर टीका-टिपण्णी करने से ही फुर्सत नहीं है. फुर्सत होगी तभी तो नेता लोग अन्य मुद्दों के बारे में सोच सकेंगे.
अंत में:
संघर्ष विराम का बार-बार उल्लंघन करने के लिए पकिस्तान के विरुद्ध क्या रणनीति होनी चाहिए?
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