सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

अन्ना हुए अब महात्मा ?

जी हाँ, गांधीवादी अन्ना हजारे को उनके गांववाले (रालेगण सिद्दि) अब महात्मा कहकर पुकारेंगे. दरअसल, इस संबंध में रालेगण सिद्धि ग्रामसभा ने एक प्रस्ताव पास कर दिया है. हालांकि खुद अन्ना ने कहा है कि वह महात्मा बनने योग्य नहीं हैं. उन्होंने कहा, मुझे सामान्य व्यक्ति ही रहने दें. गांधीजी की तरह महात्मा का संबोधन मेरे नाम के साथ न जोड़ें. दूसरी ओर, कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है. अन्ना अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन उन्हें महात्मा गांधी के बराबर पर खड़ा नहीं किया जा सकता. अन्ना और राशिद अल्वी दोनों अपनी जगह पर ठीक हैं. अन्ना अगर चाहते हैं कि उन्हें सामान्य व्यक्ति ही रहने दिया जाये तो रालेगण सिद्धि ग्रामसभा को उनकी बात रखनी चाहिए. इसी बात में अन्ना का सम्मान है. आप कोई भी उपाधी या नाम किसी पर जबरदस्ती थोप नहीं सकते. ये तो उस सम्मानित व्यक्ती का ही अपमान होगा. अन्ना का एक अपना व्यक्तित्व है. उनकी कोई बराबरी नहीं कर सकता. आज भी नहीं, शायद भविष्य में भी नहीं. वैसे, यहाँ ये बात भी विचारयोग्य है कि महात्मा शब्द का किसी ने पटेंट नहीं करवा लिया है. महात्मा शब्द दो शब्दों महा और आत्मा से मिल कर बना है, जिस का अर्थ है महान आत्मा. और, महान आत्मा किसी में भी हो सकती है. कोई भी संत पुरुष हो सकता है. देश में अनेकों ऐसे महापुरुष हैं, जिन्हें लोग महात्मा कह कर पुकारते हैं. लेकिन ऐसे लोग महात्मा कहलवा कर महात्मा गांधी का दर्जा हासिल नहीं कर जाते. हालाँकि, ऐसे महात्मा पुरुष अपना सम्मानजनक स्थान रखते हैं. अंत में: क्या अन्ना को अपने नाम के साथ महात्मा लगाना चाहिए?

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