सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

स्विस बैंक से काला धन निकाल रहे नेता?

>आज एक बड़ी अहम खबर पढने में आयी है. उकलाना, हिसार (हरियाणा),  में एक जनसभा को संबोधित करते हुए टीम अन्ना की अहम सदस्य किरण बेदी ने  कहा है कि स्विस बैंक के अधिकारियों ने खुलासा किया है कि भारतीय नेता स्विस बैंक से काला धन निकाल रहे हैं और दूसरों के नाम से संपत्ति खरीद रहे हैं. उन्होंने आगे कहा है कि लोकपाल कानून होता तो ये लोग जेल के अंदर होते.
अगर सच में ऐसा हो रहा है तो यह बेहद दुखद बात है. इस सम्बन्ध में भारत सरकार को जल्दी से जल्दी कोई कदम उठाना चाहिए. देश कि जनता को इतनी भी भोली-भाली ना समझा जाये कि नेता कुछ भी करते जाएँ. आखिर उनकी देश की जनता के प्रति कोई जवाबदेही बनती है.
>केंद्र की सरकार की प्रतिष्ठा का भी प्रश्न है. अगर उसने अभी भी इस सम्बन्ध में कोई ठोस कार्रवाही ना की तो देश का बहुत बड़ा नुक्सान हो सकता है  और देश के भ्रष्ट नेता साफ़ तोर पर बच सकते हैं. सरकार ना केवल स्विस बैंक से काला धन वापस लाने का ठोस प्रयास करे बल्कि, उन नेताओं के नामों का भी पता लगाये जिन्होंने भ्रष्टाचार के विरुद्ध देशव्यापी अभियान शुरू होने के बाद काला धन निकलवाया है और दूसरों के नाम से संपत्ति खरीद रहे हैं. सरकार ऐसे भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी करे.
>अगर आज भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई ना की गए तो आने वाला वक़्त और भी खतरनाक हो सकता है जब भ्रष्टाचार की कोई सीमा शेष ना रहेगी. भ्रष्टाचार को अगर "आर्थिक आंतकवाद" का नाम दे दिया जाये तो कोई गलती ना होगी. भ्रष्ट लोगों के कारण आज देश में जितना विकास होना चाहिए था उतना हो नहीं रहा. विकास के नाम पर जो धन सरकारों द्वारा जारी किया जाता है, बीच रास्ते में ही  उसका  एक बड़ा हिस्सा खुर्द-बुर्द कर दिया जाता है. सरकारी टेंडर जारी करने में ही भ्रष्टाचार हो जाता है. मतलब कि हर कदम पर भ्रष्टाचार अपने पाँव पसारे बैठा है. 
>अंत में:
>स्विस बैंक के अधिकारियों के खुलासे के बाद कि भारतीय नेता स्विस बैंक से काला धन निकाल रहे हैं, सरकार को क्या कार्रवाई तुरंत करनी चाहिए?

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