प्रिय मित्रो, बहस का जन्म, बहस के लिए ही किया गया है. देश-विदेश के मुद्दों पर ही नहीं बल्कि शहरों, कस्बों और देहातों के मुद्दों पर बहस करने के लिए. इसके अतिरिक्त और भी कई मुद्दे हैं. आशा रखता हूँ, आप सभी का सहयोग निरंतर मिलता रहेगा. आपके सहयोग से ही बहस, बहस बन पायेगी.....उम्मीद के साथ.... . आपका अपना, मनोज धीमान (मोबाइल; 9417600099)
शनिवार, 1 अक्टूबर 2011
सुना आपने ?
हरदोई, उत्तर प्रदेश, में कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि बाबा रामदेव जैसे संतों को गले में पत्थर बांध कर डुबा देना चाहिए.
पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव ठग है, ठग था और ठग ही रहेगा। व्यवसाय करना स्वामियों का काम नहीं होता है. जिसने सब मोह त्याग दिए उसका व्यवसाय से क्या मतलब. जैसा कि मनुस्मृति में लिखा है कि जो साधु-संत व्यवसाय करने लगे उनके गले में पत्थर बांध कर उन्हें डुबा देना चाहिए.
दिग्विजय सिंह का ये वक्तव्य बेहद आश्चर्यजनक है. लगता नहीं कि वे आज के दौर की बात कर रके हैं. अगर वे चाहते हैं कि बाबा रामदेव जैसे संतों को गले में पत्थर बांध कर डुबा देना चाहिए तो देश में मुकम्मल तौर पर वही कानून लागू हो जो उस काल में था, जब मनुस्मृति की रचना की गयी थी. देश के लोगों का वही रहन- सहन हो जो उस काल में हुआ करता था. आवाजाही के वही साधन हों जो उस समय में हुआ करते थे. देश में वही भाषा बोलचाल में हो जो उस काल में प्रचलित थी. रहने की व्यवस्था भी वैसी ही हो जैसे उस काल में थी. और भी सब कुछ वैसा ही हो, जैसा उस काल में था जब मनुस्मृति की रचना की गयी थी.
वैसे, मनुस्मृति में इस बात का भी वर्णन है कि एक शासक कैसा हो. एक शासक के गुणों का वर्णन करते हुए मनुस्मृति में लिखा गया है कि उसे बुद्धिमान, दोष मुक्त, सभ्य, ईमानदार, आत्म नियंत्रक, बड़ों का आदर करने वाला होना चाहिए. जबकि आज देश में किस तरह के शासक हैं इस के बारे में देशवासी बाखूबी तौर पर जानते हैं. उम्मीद है, दिग्विजय सिंह भी इस बात से अच्छी तरह वाकिफ होंगे. कितने खेद की बात है कि देश की लोकसभा के 543 सांसदों में से लगभग 150 आपराधिक मामलों में संलिप्त हैं. इन में से लगभग 50 सांसद जघन्य अपराधों में संलिप्त हैं.
अंत में:
क्या आप को लगता है कि देश के शासकों को आत्मनिरीक्षण की जरूरत है?
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें