बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

परेशान जनता करे भी क्या?

>घूसखोरी की आदत बहुत बुरी है. एक बार लत पड़ जाते तो फिर हटती ही नहीं. देश की जनता घूसखोरों से बेहद परेशान है. अब लोगों ने सामूहिक तौर पर घूसखोरो से दो - दो हाथ कर लेने की ठान ली है. तभी तो एक ताज़ा समाचार में बताया गया है कि मुजफ्फरपुर. जिले, बिहार, के बोचहा स्थित उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक को ग्रामीणों ने कथित तौर पर घूस लेते रंगे हाथ दबोच लिया . यह अधिकारी इंदिरा आवास के एवज में एक ग्रामीण से 22 ,500 रुपये की कथित घूस ले रहा था. ग्रामीणों ने बैंक मैनेजर के साथ-साथ उनके एक दलाल को भी पकड़ लिया. इसके बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी. पुलिस ने बैंक मैनेजर और दलाल को गिरफ्तार कर लिया है.
>सरकारी पदों पर बैठे अधिकारी मोटी तनख्वाहें लेते हैं. इस के अतिरिक्त अन्य सुख-सुविधाएं भी उनकों हासिल होती हैं. बावजूद इसके वे लोग घूस लेने से बाज नहीं आते. एक बार भी यह नहीं सोचते कि घूस देने वाले ने कितनी मेहनत से पैसा कमाया होगा, और वे उससे बेशर्मी से घूस की रकम वसूल करके अपनी जेबों में ठूंस लेते हैं. लेकिन, घूस का लिया हुआ पैसा कभी ना कभी तो अपना असर दिखता ही है. आज नहीं तो कुछ अरसे बाद. अक्सर देखा है कि एक व्यक्ति हर नाजायज तरीके से पैसा कमाता है. अंत में एक वक़्त आता है कि उस पैसे का इस्तेमाल करने वाला ही परिवार में ओई नहीं बचता. या फिर ऐसा भी देखा है की एक व्यक्ती हर नाजायज तरीका इस्तेमाल करके जायदाद बना लेता हैं. अंत में, जायदाद खंडहर में तब्दील हो जाती है क्योंकि परिवार में कोई उसे इस्तेमाल करने वाला ही शेष नहीं रह जाता. ऐसा ही और भी बहुत कुछ घट  जाता है. वैसे तो सब कुछ नियती के हाथ में ही होता है.
>उक्त मामले में अगर लोग चाहते तो पुलिस या सतकर्ता विभाग से भी मदद मांग सके थे. मगर, जनता अब सब कुछ देख चुकी है. इसीलिए, अब उसने स्वयं ही घूसखोरो से निबटने की ठान ली है. पुलिस और सम्बंधित विभागों को भी इस बात पर गौर करना चाहिए कि अब जनता उन्हें पहले सूचना क्यों नहीं देती. क्या जनता का उन पर से भरोसा उठ गया है. यह एक विचारणीय विष्य है.
>अंत में;
>क्या जनता का घूसखोरों से स्वयं ही निबटना उचित है?
 

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