गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011

भीतर का रावण ?

>अन्ना हजारे ने आज अपने गांव रालेगढ़ सिद्धी में रावण दहन किया. इस मौके पर वहां मौजूद लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा उन्होंने कहा कि हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने अंदर मौजूद रावण को खत्म कर स्वच्छ समाज बनाने की ओर कदम बढ़ाएंगे. अन्ना ने ये भी कहा कि हम सभी के अंदर कहीं ना कहीं रावण मौजूद है, जिसे बाहर निकालना बहुत जरूरी है. किसी के अंदर अहंकार के रुप में तो किसी के अंदर भ्रष्टाचार के रुप में. हमें कोशिश कर किसी भी तरीके से रावण को बाहर करना होगा, तभी एक नए समाज का तानाबाना बुना जा सकता है.
> जो बात अन्ना ने कही हैं उस में बहुत गहराई है. सच ही तो है, रावण हम सब में कहीं ना कहीं मौजूद है. यही वजह है कि आये दिन बलात्कार की घटनाएँ होती हैं, क़त्ल होते हैं, चोरी होती है, डाके पड़ते हैं, अपहरण होते हैं, भ्रष्टाचार होता है. और भी जाने क्या कुछ  नहीं होता. हर बरस दशहरे वाले दिन रावण दहन होता है,  रावण के पुतले देश भर में जलाये जाते हैं. इन आयोजनों पर करोड़ों - अरबों रूपए खर्च कर दिए जाते हैं. जबकि, इस भारी भरकम राशि से समाज के लिए कई सार्थक कार्य किये जा सकते हैं. इन कार्यों से अनेकों जरूरतमंद देशवासियों को लाभ पहुँच सकता है. समारोह फिर भी किये जा सकते हैं, लेकिन सादा ढंग से.
>हर साल रावण दहन करने के बहाने लोग रावण को यादों में, दिल में जिन्दा रखते हैं. कई महीनों पहले ही समारोहों के आयोजन की तेयारियां शुरू हो जाती हैं. रावण दहन करके उसे दोबारा जिन्दा कर दिया जाता है, उसका फिर से दहन करने के लिए. लेकिन, हम लोगों के भीतर जो रावण रहता है, उसके दहन के बारे में हम लोगों ने कभी सोचा ही नहीं. 
अंत में:
हम लोगों के भीतर बसते रावण का दहन कैसे हो सकता है?   

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